सीखने को प्रभावित करने वाले कारकों में समुदाय एवं विद्यालय की भूमिका का वर्णन कीजिए।

प्रश्न. _  सीखने को प्रभावित करने वाले कारकों में समुदाय एवं विद्यालय की भूमिका का वर्णन कीजिए।



कारक निम्नलिखित हैं : 

उत्तर _।  समुदाय की भूमिका सीखने को प्रभावित करने वाले समुदाय से सम्बन्धित

 1. सामाजिक प्रोत्साहन समाज में मिलने वाला प्रोत्साहन बालक के सीखने को

प्रभावित करता है। सामाजिक प्रोत्साहन बालक को समाज के अन्दर व्यक्तियों से या तो मौखिक रूप से मिलता है या समाज से सुविधाओं के रूप में मिलता है। जिन समाज में बालक कमो प्रोत्साहन या सुविधाओं के रूप में सामाजिक प्रोत्साहन मिलता है उस समाजके बालक सामाजिक रूप में सामाजिक प्रोत्साहन मिलता है उस समाज के बालक सामाजिक रूप से अधिक व्यवहारकुशल होते हैं।

2. प्रशंसा और निन्दा - प्रशंसा और निन्दा भी महत्त्वपूर्ण कारक हैं जिनकी उपस्थिति में सीखने वाले बालक को प्रोत्साहन मिलता है। यह देखा गया है कि यदि बालक के सीखते समय अच्छे प्रयासों या कार्यों के लिए प्रशंसा की जाये और त्रुटिपूर्ण प्रयासों या कार्यों के लिए निन्दा की जाये तो इस अवस्था में प्रशंसा और निन्दा बालक के सीखने में सहायक होते हैं अर्थात् प्रेरक का कार्य करते हैं

3. अनुकरण- किम्बाल यंग के अनुसार, "एक ऐसी क्रिया करना है जो किसी अन्य व्यक्ति की क्रिया के सामन या उससे मिलती-जुलती हो। अनुकरण के द्वारा एक बच्चा समाज में प्रचलित भाषा को नहीं सीखता, 

बल्कि वह सामाजिक व्यवहार, रीति-रिवाज, फैशन, वेश-भूषा, सामान्य संस्कृति और सभ्यता को भी अनुकरण के द्वारा सीखता है। अतः अनुकरण सीखने का एक महत्वपूर्ण सामाजिक कारक है। टार्डे के अनुसार, अनुकरण पर समस्त समाज निर्भर है तथा सम्पूर्ण सामाजिक प्रक्रिया अनुकरण और आविष्कार पर आधारित है। समाज में अनुकरण का महत्त्वपूर्ण स्थान है, परन्तु टार्डे की इस बात को कि 'समाज अनुकरण है' स्वीकार नहीं करना चाहिए, क्योंकि सामाजिक व्यवहार सीखने को अनेक कारक प्रभावित करते हैं। बालक सामाजिक व्यवहावर और परम्पराओं का अपने माता-पिता, गुरुजनों एवं परिवार तथा समाज के अन्य व्यक्तियों से सीखता है। अनुकरण के कारण समाज की संस्कृति पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलती है। इतना ही नहीं बल्कि अनुकरण के द्वारा समाज में नये विचावर भी तेजी से फैलते हैं ।

 4. सुझाव — किम्बाल बंग के अनुसार, "सुझाव शब्दों, चित्रों या इसी प्रकार के किसी दूसरे माध्यम द्वारा दिया जाने वाला वह सन्देश है जो प्रमाण या तर्क के बिना स्वीकार कर लिया जाता है

सामाजिक व्यवहार को सीखने में सुझाव एक महत्वपूर्ण कारक है। सुझावों के द्वारा भी व्यक्ति समाज में प्रचलित रीति-रिवाजों, मूल्यों और आदर्शों आदि को सीखता है। हुलयालकर तथा उसके साथियों के अनुसार, “सामाजिक जीवन में सुझाव का बहुत महत्त्व । यह एक महत्त्वपूर्ण तरीका है जिसके द्वारा व्यक्तियों के व्यवहार को बदला जा सकता है। व्यक्ति के समाजीकरण में भी इसका मुख्य कार्य है। इसके द्वारा व्यक्तियों को बना

बिगाड़ा और फिर बनाया जा सकता है।

5. सहानुभूति- अकोलकर के अनुसार, "सहानुभूति का अर्थ है-उसी प्रकार के संवेग का अनुभव करना, जिसका अनुभव हमारा साथी करता है।

सहानुभूति के द्वारा ही एक व्यक्ति दूसरे के कष्टों का साझेदार बनना सीखता है, दूसरों को सांत्वना देना सीखता है। सहानुभूति द्वारा व्यक्ति को वश में किया जा सकता है और जब कोई व्यक्ति वश में हो तो उसे सरलता से सिखाया जा सकता है। अतः सीने में सहानुभूत एक महत्त्वपूर्ण कारक है ।

6. सहयोग बहुत से सामाजिक व्यवहार ऐसे हैं कि उसके सीखवने के लिए एक व्यक्ति के सहयोग की आवश्यकता होती है। प्रत्येक बालक अपने माता-पिता, भाई-बहनों, परिवार के अन्य सदस्यों तथा समाज के लोगों से सहयोग की आशा रखता है। बालक के किसी प्रकार के सीखने में यदि आवश्यक सहयोग दिया जाये तो बालक जल्दी सीखता है। घर में माँ बच्चे का हाथ पकड़कर उठाना, बिठाना, चलना, फिरना ही हीं, बल्कि सहयोग की सहायता से बालक सामाजिक जीवन की तमाम बातों को सीखता 

7. प्रतिस्पद्ध—प्रतिस्पर्द्धा से भी व्यक्ति को सीखने में प्रेरणा मिलती है। पुलतः एक व्यक्ति जल्दी और अधिक सीखता है। स्पर्द्धा में एक व्यक्ति उद्देश्यों की प्राप्ति की दौड़ मेंहै। 








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