प्रश्न 28, विद्यालय अभिलेखों के महत्व का वर्णन करें।
उत्तर – विद्यालय समाज द्वारा स्थापित एक औपचारिक संस्था है। विद्यालय को यह विश्वास दिलाना होता है कि समाज उससे जो आशा रखता है, उसे पूरा करने में वह पूरी तरह से अपने उत्तरदायित्व का निर्वाह कर रहा है। इसी प्रकार प्रान्तीय एवं केन्द्रीय सरकार
को भी संतुष्ट करना होता है। विद्यालय की कार्यवाही के लिए उनके द्वारा जो भी आदेश
दिए जा रहे हैं उनका वह पूरी तरह से पालन कर रहा है और जो पैसा विद्यालय व्यवस्था
के लिए दिया जा रहा है उस पैसे को विद्यालय, बच्चों और शिक्षा के हित में खर्च किया
जा रहा है। इस प्रकार की सभी सूचनाएँ प्रदान करने और कार्यकुशलता को सिद्ध करने
के लिए मुख्याध्यापक को विद्यालय में सभी बातों का विधिवत रिकार्ड रखना होता है और
इन अभिलेखों से सिद्ध करना होता है कि विद्यालय का कार्य निश्चित उद्देश्यों एवं नियमों
के अनुसार कुशलतापूर्वक चल रहा है
कहने का तात्पर्य यह है कि विद्यालय के कार्यक्रमों की योजना बनाने, उनका संगठन
व प्रशासन करने, क्रियान्वित करने, उनका निरीक्षण व मार्गदर्शन करने और विभिन्न विभागीय
जांच-पड़ताल का जवाब देने आदि सभी कार्यों में विद्यालय के उचित और विधिवत रिकार्ड
व रजिस्टरों का अमूल्य योगदान होता है। वैसे तो रिकार्ड की आवश्यकताओं से ही इसके
महत्व व लाभ का संक्षिप्त परिचय मिल जाता है। परन्तु विद्यार्थियों की आवश्यकताओं को
ध्यान में रखते हुए यहाँ पर विद्यालय के अभिलेखों के महत्त्व एवं लाभों का वर्णन अलग
से किया जा रहा है। विद्यालय के विभिन्न अभिलेखों के महत्त्व व लाभ को निम्न प्रकार
से स्पष्ट किया जा सकता है।
1. विद्यालय के अभिलेखों की सहायता से विद्यालय में प्रविष्ट होने वाले छात्रों की
जानकारी हो जाती है।
2. विद्यार्थी का पूर्ण इतिहास, पारिवारिक पृष्ठभूमि, शैक्षणिक योग्यता आदि का पता
चल जाता है।
3. अध्यापकों को छात्र के व्यवहार, चरित्र, आदतों आदि का ज्ञान हो जाता है।
4. अध्यापक यह जान जाते हैं कि कौन-सा विद्यार्थी कौन-सा कार्य कर सकता है।
5. विद्यार्थियों में कार्य का वितरण करने में सहायता मिलती है।
6. छात्रों को विभिन्न सेक्शनों में वर्गीकृत करने में सहायता मिलती है।
7. प्रत्येक छात्र की विद्यालय में नियमित उपस्थिति का पता चल जाता है।
8. योग्य, सामान्य एवं मानसिक रूप से पिछड़े विद्यार्थियों का ज्ञान हो जाता है
9. विद्यार्थियों को योग्यता के आधार पर उनके उचित मार्गदर्शन एवं उनके विकास
के लिए विशेष व्यवस्था करने में सहायता मिलती है।10. विद्यालय के सभी कार्यों को ठीक समय पर आयोजित करने में सहायता मिलती है।
11. कार्यों के कुशल संचालन में सफलता मिलती है।
12. छात्रों को अपनी प्रगति का सही सही ज्ञान हो जाता है।
13. अपनी योग्यतानुसार प्रगति करने के लिए प्रोत्साहन मिलता है।
14. उन्हें अपने विकास के लिए उचित मार्गदर्शन मिलता है, इससे विद्यालय में ठीक
समायोजन में सहायता मिलती है ।
15. सभी अध्यापकों व विद्यार्थियों को विद्यालय की प्रगति एवं समस्याओं की जानकारी
होती रहती है।
16. समय, शक्ति व साधनों का सदुपयोग होता है।
17. सभी प्रकार का हिसाब-किताब ठीक-ठीक रखा जाता है, किसी प्रकार की गड़बड़ी
की संभावना नहीं रहती।
18. पिछली कमियों को दूर कर विद्यालय कार्य में सुधार लाने में सहायता मिलती है ।
19. किसी भी प्रकार की सूचना आसानी से उपलब्ध हो जाती है
20. हर सामग्री का पूरा-पूरा लेखा-जोखा रहने से सामग्री सुरक्षित रहती है।
21. स्कूल की वित्तीय स्थिति का ज्ञान होता रहता है।
22. यह ज्ञान होता रहता है कि विद्यालय के विभिन्न कोषों व फण्ड का सही उपयोग
हो रहा है या नहीं।
23. सभी प्रकार की रिपोर्ट ठीक प्रकार से तैयार करने में सहायता मिलती है।
24. शैक्षिक अनुसंधान के लिए सूचनाएँ देने में सहायता मिलती है।
25. स्थानीय एवं राजकीय अधिकारियों को आवश्यक सूचना देने में सहायता मिलती है।
26. विद्यालय की प्रगति का तुलनात्मक मूल्यांकन करने में सहायता मिलती है।
27. विद्यालयों के विकास की योजनाएँ बनाने में ये अभिलेख सरकार की बहुत सहायता
करते हैं ।
28. पुराने अध्यापकों या पुराने विद्यार्थियों के बारे में किसी बात की जांच-पड़ताल करने
में इन्हीं अभिलेखों की सहायता लेनी पड़ती है।
29. इन्हीं अभिलेखों के आधार पर यह निश्चित किया जा सकता है कि विद्यालय में
किसी प्रशासनिक या अन्य परिवर्तन की आवश्यकता है या नहीं।
30. किसी भी विद्यार्थी के माता-पिता या अन्य किसी व्यक्ति से उस विद्यार्थी के सम्बंध
में बातचीत करते समय अभिलेखों के द्वारा पूरी बात को सुरक्षित रखा जा सकता है।इस प्रकार हम देखते हैं कि विद्यालय अभिलेख अध्यापकों एवं विद्यार्थियों की सभी
प्रकार की आवश्यकताओं को पूरा करने तथा विद्यालय शिक्षा के उद्देश्यों की यथासम्भव पूर्ति
करने तथा विद्यालय के संगठन एवं प्रशासन की एक सुव्यवस्थित रूप प्रदान करने में भरसक
सहयोग देते हैं। इन अभिलेखों के इस महत्व एवं उपयोगिता को देखते हुए इनकी भलीभांति
व्यवस्था एवं रख-रखाव भी अति आवश्यक हैं ।
प्रश्न 7. शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों के प्रकारों का विस्तृत वर्णन करें ।
प्रबंधन, विद्यालय में पढ़ाए जानेवाले विभिन्न विषयों की विषय-वस्तु तथा वर्ग कक्ष विनियम
की तैयारी इत्यादि सिखाई जाती है। साथ ही, इन प्रशिक्षणों के माध्यम से अधिगम संसाधनों
का चयन संगठन एवं उपयोग करने की दक्षता विकसित करने का कार्य भी होता है। छात्रों
के लिए मार्गदर्शन, निर्देशन एवं परामर्श हेतु भी प्रशिक्षण दिया जाता है इस प्रशिक्षण के द्वारा शिक्षकों में आवश्यक अभिवृत्ति विकसित करने का
भी प्रयास किया जाता है। इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों में शिक्षकों को इस बात की भी जानकारी
दी जाती है कि बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए समुदाय के साथ बेहतर सम्बन्ध आवश्य
है। शिक्षकों के शिक्षकीय आचार संहिता के बारे में भी जानकारी दी जाती है। समुदा
के साथ शिक्षकों के तालमेल के बारे में भी बताया जाता है। विभिन्न प्रकार के शैक्षि
गतिविधियों एवं शैक्षणिक कौशलों की भी जानकारी दी जाती हैबच्चे अर्जित अथवा सृजित ज्ञान का उपयोग व्यावहारिक जीवन में कर सकें,जो शिक्षकों ने वर्षों पूर्व सीखी थीं। सेवाकालीन शिक्षा की आवश्यकता
सर्वप्रथम 1949 में अनुभव की गई जब विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग ने कहा, "शिक्षक को
जीवन्त और अभिनव बना रहने के लिए समय-समय पर शिष्य बनाना चाहिए।"
सेवाकालीन प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से सेवारत शिक्षकों के कार्य क्षमता एवं
कुशलता में वृद्धि हेतु प्रयास किया जाता है। आज का युग ज्ञान के विस्फोट का युग
है।
शिक्षा के क्षेत्र में हमेशा नवीन विचारधाराओं का उदय हो रहा है जिसके कारण पूरी शिक्षण
प्रक्रिया में बदलाव आया है। इन बदलावों के मद्देनजर सेवाकालीन प्रशिक्षण की आवश्यकता
है।

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