विद्यालय संस्कृति और प्रबंधन। D.el.ed Question answer




 प्रश्न 1. विद्यालय प्रबंधन की अवधारणा से क्या समझते है ? विद्यालय प्रबंधन की आवश्यकता पर प्रकाश डालें।

उत्तर – विद्यालय प्रबंधन शिक्षायी विकास श्रृंखला का एक महत्त्वपूर्ण आयाम है जो कि विद्यालय एवं स्थान विशेष की प्रत्येक गतिविधि से सम्बद्ध होता है। बेहतर प्रबंधन विद्यार्थियों को विद्यालय आने एवं विभिन्न गतिविधियों में सम्मिलित होने के लिए प्रोत्साहित करता है। विद्यालयों में कार्यक्रम की शुरूआत 'चेतना सत्र से होती है जिसमें बाल संसद, मीना मंच, शिक्षक-शिक्षिका एवं प्रधानाचार्य सबकी भूमिका होती है। दिन की शुरुआत रूचिकर एवं योजनाबद्ध तरीके से करने का प्रभाव विद्यालय एवं कक्षायी गतिविधियों पर साकारात्मक रूप से पड़ता है। विद्यालय के बेहतर प्रबंधन के लिए समय-सारणी, वार्षिक कैलेण्डर आदि की आवश्यकता पड़ती है। इसके साथ ही बच्चों को विभिन्न आपदाओं, उनके प्रभावों एवं उनसे सुरक्षा के प्रति जागरूक करने की आवश्यकता है।

विद्यालय प्रबंधन का अर्थ-विद्यालय की व्यवस्था के साथ-साथ मानव सम्बन्ध से भी है। सुन्दर प्रबंधन एवं उपयुक्त व्यवस्था पर ही विद्यालय की सफलता एवं सार्थकता निर्भर करती है ।

विद्यालय प्रबंधन का उद्देश्य है-सरल, सुगम तथा प्रभावी रूप से विद्यालय के निर्धारित उद्देश्यों को प्राप्त करना। विद्यालय प्रबंधन के अन्तर्गत मूल्याँकन के आधार पर यह निर्धारित किया जाता है कि कार्य कहाँ से प्रारंभ किया जाये तथा कौन-कौन से और कैसे संसाधन उपाय किए जाएँ कि उनका सर्वोत्तम उपयोग किया जा सके। मानवीय संसाधन के कार्यों • की सफलता कैसे प्राप्त की जाए ?

विद्यालय प्रबंधन की सफलता शिक्षकों तथा शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की कार्यकुशलता एवं दक्षता पर निर्भर करती है।

विद्यालय प्रबंधन की आवश्यकता :

1. विद्यालय प्रबंधन की पहली आवश्यकता यह है कि बच्चों में लोकतांत्रिक मूल्यों .. यथा-समता, स्वतंत्रता, श्रम की गरिमा का सम्मान, अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता, पारस्परिक सहयोग, भ्रातृत्ववाद तथा सहनशीलता आदि मूल्यों का विकास किया जा सकें। इन मूल्यों के विकास के लिए आवश्यक शैक्षिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा सके तथा विद्यार्थीगण विभिन्न प्रकार की गतिविधियों में सहभागी बन सके।

2. विद्यालय और समुदाय के बीच तालमेल और समन्वय विकसित करना भी विद्यालय

प्रबन्धन के लिए अनिवार्य है। शिक्षकों को समुदाय की अपेक्षाओं को समझना चाहिए और उसी अनुसार विद्यार्थियों को सीखाना चाहिए। समुदाय को भी विद्यालय के विकास के मार्ग में अवरोधक नहीं होना चाहिए। विद्यालय शिक्षा समिति तथा अभिभावक शिक्षक गोष्ठी का भी नियमित बैठक होते रहना चाहिए ताकि समुदाय का सहयोग हमेशा प्राप्त हो सके। 

3. विद्यालय प्रबंधन से अपेक्षा है कि वह शिक्षकों सतत् एवं समग्र विकास पर ध्यान दें। शिक्षकों के सतत् विकास के लिए उनकी योग्यताओं की वृद्धि के लिए प्रोत्साहन एवंमदद की जानी चाहिए । पुस्तकालय एवं प्रयोगशाला के समुचित उपयोग पर बल देना चाहिए ताकि शिक्षकों का भी लगातार उन्नयन हो। समय-समय पर शिक्षकों के लिए कार्यशालाएँ तथा प्रशिक्षण कार्यक्रमों की व्यवस्था की जानी चाहिए।

4. विद्यालय में नवाचारी तथा सृजनात्मक कार्यों पर बल देना चाहिए जिससे शिक्षा में नए शोधों, नए विचारों तथा नए परिप्रेक्ष्यों का विकास हो सके। नवाचारों से ही समस्याओं के हल करने के नए रास्ते विकसित हो सकते हैं

5. विद्यालय संचालन हेतु मानवीय, भौतिक तथा वित्तीय संसाधनों का बेहतर ढंग से उपयोग किया जाना चाहिए। विद्यालय भवन, खेल के मैदान, प्रयोगशाला, पुस्तकालय, कम्प्यूटर आदि का व्यवस्थित ढंग से प्रयोग होना चाहिए। बेहतर TLMs, Teacher Aids Models बनवाकर विद्यार्थियों को ज्यादा-से-जयादा लाभान्वित किया जा सकता 

6. विद्यालय प्रबंधन को चाहिए कि पीने योग्य पानी, बिजली, स्वच्छता आदि विद्यालय परिसर में बहाल कराएँ ताकि शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को पढ़ने-लिखने लायक वातावरण के निर्माण में कोई दिक्कत न हो

7. विद्यालय में सभी कर्मचारियों के बीच समन्वय स्थापित करना भी विद्यालय प्रबंधन का एक महत्त्वपूर्ण उत्तरदायित्व है। शिक्षकों एवं कर्मचारियों के मध्य पारस्परिक सहयोग के बिना विद्यालय का समुचित संचालन संभव नहीं है। पक्षपातपूर्ण रवैया त्यागकर विद्यालय में सहयोगात्मक एवं सहानुभूतिपूर्ण रवैया अपनाना चाहि

विद्यालय के सफल संचालन में विद्यालय प्रबंधन की अत्यन्त आवश्यकता होती है। विद्यालय प्रबंधन विकेन्द्रीकृत भी होना अनिवार्य है। इसके अभाव में विद्यालय में चारों तरफ अशान्ति एवं अराजकता की स्थिति होगी।

 प्रश्न 2. विद्यालय प्रबंधन की संरचना में समुदाय की भूमिका का वर्णन करें

उत्तर- हमारे देश में शिक्षा की व्यवस्था करना केन्द्रीय सरकार और राज्य सरकारों का संयुक्त कार्य है। विद्यालय सरकार द्वारा स्थापित हो या समुदाय द्वारा स्थापित हो, अपना कार्य तब तक पूरा नहीं कर सकते जबतक उन्हें परिवारों और समुदायों का सहयोग प्राप्त नहीं होता है। उन्हें समुदाय से आर्थिक सहायता की आवश्यकता होती है, विशेषज्ञों के सहयोग की जरूरत होती है। इतना ही नहीं जब तक विद्यालय और समुदाय में सामंजस्य नहीं होता है तब तक बच्चे आचरण की शिक्षा ग्रहण नहीं कर पाते हैं

विद्यालय प्रबंधन में यदि समुदाय अपनी भूमिका सही तरीके से नहीं निभाएगा तो प्रबंधन अपनी मनमानी करेगा। समुदाय को विद्यालय के सभी कार्यक्रमों के उचित संचालन में अपना पूर्ण सहयोग देना होता है। विद्यालय की आवश्यकताओं को पूरी करने में मदद देनी होती है तथा समुदाय के उचित सहयोग से विद्यालय अपनी प्रगति के पथ पर अग्रसर होता है। प्रबंधन में समुदाय की भागीदारी से विद्यालय का चतुर्दिक विकास होता 

समुदाय नामांकन के समय, उपस्थिति के समय तथा मध्याह्न भोजन के संचालन में भी सक्रिय भूमिका निभाता है। उदाहरणार्थ- यदि किसी विद्यालय में नामांकन के बावजूद बच्चे स्कूल नहीं आते हैं तो समुदाय के लोगों को चाहिए कि वह विद्यालय प्रबंधन से इस विषय पर बात करें, कारण पता करके निवारण का उपाय करें। इसके लिए अभिभावक शिक्षक गोष्ठी की भूमिका महत्त्वपूर्ण होती है। इस गोष्ठी में बच्चों एवं विद्यालय की समस्याओं पर खुल कर चर्चा हो सकती है और निवारण के उपायों पर पहुंचा जा सकता है

शिक्षक नियमित रूप से सही समय पर विद्यालय आएँ तथा समय-सारणी का अक्षरश: पालन करें। इसके लिए समुदाय तत्पर हो तब शत्-प्रतिशत साकारात्मक परिणाम प्राप्त।है।किया जा सकता है और विद्यालय के सर्वांगीण विकास के लक्ष्य को प्राप्त करना आसान होता है।

विद्यालय शिक्षा समिति तथा विद्यालय प्रबंधन समिति जो समुदाय का ही एक प्रतिरूप है जो विकेन्द्रीकरण के सिद्धान्त पर कार्यरत है। इनके साकारात्मक पहल से मध्याह्न भोजन तथा विद्यालय विकास में प्रगति देखी जा सकती है। मेन्यु के अनुसार बच्चों को खाना दिया जा रहा है कि नहीं। यह कार्य सुचारू रूप से समुदाय के सहयोग से सही पूरा किया जा सकता है ।

यदि विद्यालय को कभी स्थानीय लोगों के कारण अनुशासनहीनता का सामना करना पड़ता है तो समुदाय के कुछ गणमान्य लोगों के हस्तक्षेप से अनुशासन को बनाए रखने में मदद मिलती है। यदि विद्यालय के ही कुछ कर्मचारी प्रबंधन पर अनावश्यक दबाव बनाते हुए अपनी मनमानी करते हैं तो समुदाय के लोग उन्हें ऐसा करने से रोकते हैं। प्रबंधन में शान्ति अनुशासन बनाये रखने में मदद करते हैं। इसके अतिरिक्त विद्यालयों को समुदायों का सहयोग प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित उपाय करने चाहिए।

1. स्थानीय आवश्यकताओं की पूर्ति-हमारे देश में शिक्षा का पाठ्यक्रम लचीला बनाया गया है। उसमें कुछ विषयों, उद्योगों एवं क्रियाओं का चयन स्थानीय आवश्यकताओं यानी समुदाय की माँगों के अनुसार किया गया है। विद्यालय को समुदाय की माँग के अनुसार ही इसका चुनाव करना चाहिए। उस स्थिति में विद्यालय और समुदाय एक-दूसरे के पास आ सकते हैं।

2. विद्यालय क्रियाओं में विशेषज्ञों का सहयोग–अधिकतर समुदायों में विद्यालय पाठ्य-विषयों एवं क्रियाओं से सम्बन्धित ज्ञान एवं दक्षता रखनेवाले सदस्य होते हैं। विद्यालय को उन दक्ष विशेषज्ञों को आमंत्रित करना चाहिए तथा उचित सम्मान करना चाहिए। समय-समय पर इनका व्याख्यान करना चाहिए तथा इनके साथ समूह चर्चा करनी चाहिए। इनके दक्षताओं को विद्यार्थियों तक पहुँचाने का मार्ग प्रशस्त किया जाना चाहिए जिससे विद्यालय कार्यों में समुदाय का सहयोग बढ़ सकता है

3. विद्यालयी सहगामी क्रियाओं में विशेषज्ञों का सहयोग-सभी समुदायों में खेल-कूद विशेषज्ञ तथा साहित्यिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों में दक्षता एवं रुचि रखनेवाले व्यक्ति रहते हैं, विद्यालयों को इन्हें अपनी विशेष समितियों का सदस्य बनाना चाहिए । इन्हें सम्मान देकर इनकी योग्यताओं एवं दक्षताओं का लाभ भी उठाना चाहिए ।

4. सामुदायिक आयोजनों में विद्यालयों का सहयोग–विद्यालयों को समुदाय द्वारा आयोजित खेल-कूद, साहित्यिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम तथा अन्य उत्सवों में सहयोग देना चाहिए। इस स्थिति में समुदाय के सदस्य विद्यालयों से प्रभावित होंगे ही।

5. समाज सेवा–सहयोग चाहते हो तो सहयोग करो। अगर समुदाय को यह विश्वास हो जाए कि विद्यालय सचमुच समुदाय के हित के लिए कार्य कर रहे हैं तो वे विद्यालयों का सहयोग जरूर करेंगे। विद्यालयों को अपने अन्दर समाज-सेवा संगठनों का गठन करना चाहिए, सेवा करनी चाहिए। समुदाय द्वारा आयोजित धार्मिक उत्सवों और मेलों में समाज सेवा कार्य करें।

6. समुदाय को विद्यालय भवन एवं खेल के मैदान आदि की सुविधा-विद्यालयों को सामुदायिक कार्यों के लिए समुदाय को विद्यालय भवन फर्नीचर व खेल के मैदान तथा अन्य सामग्री सुलभ करायी जानी चाहिए। ऐसा करते समय यह जरूर देखा जाना चाहिए कि विद्यालय कार्य में कोई अवरोधहोस तरह विद्यालय समुदाय के पास आएँगे,

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