प्रश्न 2. एक संतुलित और संदर्भयुक्त ECCE पाठचर्या को समझाए । D.el.ed question answer

 प्रश्न 2. एक संतुलित और संदर्भयुक्त ECCE पाठचर्या को समझाए ।





उत्तर- जीवन के प्रथम छह वर्ष मानव जीवन के विकास के मुख्य स्तम्भ है जिसमें जीवन के विकास का सर्वाधिक तेजी से उभार होता है। इन वर्षों में मानव मस्तिष्क का तेजी से विकास होता है। ECCE ने बच्चे के विकास में काफी सराहनीय योगदान दिया है। इस तरह के कार्यक्रम बनाये गए है कि बच्चे का समग्र एवं सर्वांगीण विकास हो सकें। ECCE के अन्तर्गत पाठ्यचर्या में बच्चों के समग्र विकास हेतु निम्नलिखित तथ्यों पर व्यापक जोर दिया है। 1. शारीरिक तथा गामक विकास (Physical and Motor Development) - गामक कौशल, माँसपेशियों का समन्वय, आँख एवं हाथ का समन्वय, संतुलन का ज्ञान, शारीरिक


समन्वय, स्पेश एवं दिशा की जागरूकता, पोषण, स्वास्थ्य स्थिति एवं उसका व्यवहार 2. भाषा विकास (Language Development) - सुनना, बोलने एवं वार्तालाप का कौशल, शब्द भण्डार, अक्षरों एवं शब्दों के उच्चारण, अक्षरों की पहचान, शब्दों एवं वाक्यों का निर्माण प्रारम्भिक लेखन, विद्यालय में भाषा का परिचय।


3. संज्ञानात्मक अथवा मानसिक विकास (Cognitive Development) कई संकल्पनाओं का विकास यथा प्री-संख्या तथा संख्या, संख्याओं के विभिन्न प्रक्रियाएँ यथा तुलना (Lomparison) वर्गीकरण (Classification), श्रेणीकरण, विभिन्न इकाइयों का एक-दूसरे में बदलना, गिनती, Data Handling से सम्बन्धित कौशल, तर्क शक्ति एवं समस्या समाधान, विभिन्न संकल्पनाओं से सम्बन्धित शारीरिक, सामाजिक एवं जैविक पर्यावरणीय ज्ञान


4. सामाजिक-वैयक्तिक तथा संवेगात्मक विकास (Socio-Personal and Emotional Development)- स्वयं से सम्बन्धित संकल्पना का विकास, आदतों का निर्माण, उत्सुकता (Inibiative and Curriosity), सहयोग, सामाजिक सम्बन्ध, समूह वार्तालाप (Group Interaction) Pro-Social Behaviour अपने अनुभवों को शेयर करना तथा दूसरे के अनुभवों को स्वीकारना इत्यादि से सम्बन्धित ज्ञान।


5. ज्ञानेन्द्रियाँ विकास (Sensonial Development)


पाँचों ज्ञानेन्द्रियों का विकास


(Development of the five sense through visual, aduitory and kinaesthetic


Experiences) 6. सृजनशीलता तथा सौन्दर्य का बोध (Development of Creative and Aesthetic


Appreciation) : विभिन्न कलाओं का खोज, नृत्य, नाटक तथा संगीत गतिविधियों का ज्ञान


(Expression and appreciation for artistic, dance/drama and musical activities). ECCE एक संतुलित कार्यक्रम है जिसमें भाषागत, संवेगात्मक, सृजन एवं गामक आधारित गतिविधियों पर जोर दिया जाता है। यह सिर्फ 3R'S की संकल्पना पर आधारित नहीं है और न संगीत एवं कविताओं के पाठ पर केवल जोर देती है। यह बाल केन्द्रित कार्यक्रम है जो प्रत्येक बच्चे के अधिगम एवं सांवेगिक जरूरतों को पूरा करती है। इसके लिए विभिन्न तरह की रोचक एवं आनन्दमयी गतिविधियाँ आयोजित की जाती हैं। यह सिर्फ औपचारिक केन्द्रीकृत शिक्षक केन्द्रित कार्यक्रम या ऐप्रोच नहीं है। यह कार्यक्रम बच्चों को लिखने, पढ़ने एवं गणितीय गणनाओं के लिए तैयार करती है। यह कार्यक्रम ECCE अप्रत्यक्ष रूप से बच्चों के स्वनियंत्रण एवं अनुशासन को सुनिश्चित करती है। यह कठिन वर्ग-कक्ष के अनुशासन का समर्थन नहीं करती। ECCE कार्यक्रम बच्चों के समग्र विकास को सुनिश्चित करती है। यह बच्चों के पर्याप्त देखभाल, पोषण पर फोकस करती है तथा इस ओर Parent wnselling समय-समय कर आयोजित करती है।

Suggestive Developmentally Appropriate/Age appropriate Activites for ECCE


ECCE के लिए उम्र आधारित आवश्यक गतिविधियाँ For Children Under 3 Yrs.


खेल एवं स्वास्थ्य पर जोर, पोषण बड़े बच्चों के साथ वार्तालाप (A lot of adult-child Interaction) उदाहरण-शिशु खेल, पारस्परिक गीत, कई तरह के खेल सामग्रियों की व्यवस्था, चित्रकला, बाल कहानियाँ इत्यादि, खुला खेल का मैदान एवं स्वच्छता पर जोर।


आवश्यक सामग्री (Material and Equipment) :


1. Good Toys for Young Infants: वे खिलौनों तक पहुँचे, सकें, वे घंटी से या पटक कर आवाज कर सके, मुलायम गुड़िया-गेंदों, किताबों को हुये देखें।


पकड़ सकें, हिला


2. Good Toys for older Infants: गुड़िया, कठपुतलियों, प्लास्टिक एवं लकड़ियों की गाड़ियाँ पहिया सहित, पानी का खिलौना, प्लास्टिक का कटोरा, गेंदें, मुलायम लकड़ी या प्लास्टिक का blocks गेंद को लुढ़काना एवं खींचना इत्यादि।


3. Good toys for 1 year olds: बोर्ड की पुस्तकें आसान उदाहरणों या वास्तविक वस्तुओं के फोटो सहित, गीत, कविताएँ, आसान कहानियाँ चित्र सहित ज्ञानप्रद उद्देश्यों के साथ, कठपुतलियाँ, खिलौने, प्लास्टिक निर्मित जानवर - पशु, लकड़ी के मूर्त्ति, खिलौने पहिये के साथ।

4. Good toys for 2 year olds: Wood Puzzles (with 4 to 12 pieces), Blocks आकार, रंग, गंध, आयतन में फर्क करने के लिए, परिवहन से सम्बन्धित खिलौने, बच्चों से सम्बन्धित फर्निचर यथा किचेन से चेयर, डिनर टेबुल इत्यादि गुड़िया एवं उससे सम्बन्धित, बड़े पेपर चित्र के लिए, ब्रश कलर पेन्सिल, कविता पाठ से सम्बन्धित उपकरण, चित्रात्मक पुस्तकें एवं उनका परिचय।


5. For children between 3 to 4 years नियोजित खेल आधारित कार्यक्रम जो बच्चे अपने ग्रुप या बड़ों के साथ भी खेल सकें जिससे उनका सर्वांगीण विकास हो। इसके लिए उन्हें बारम्बार अवसर दिये जायें तथा गाइड भी सयम-समय पर निर्देशित करें।


5. Basic Tents of Curriculum Development (i) बच्चों के क्षमता एवं आवश्यकता पर आधारित


:


(ii) बच्चों के चिन्तन के प्रमुख विशेषताओं की पहचान। (iii) औपचारिक एवं अनौपचारिक वार्त्ताओं का मिश्रण।


(iv) पारिवारिकता एवं चुनौति प्रत्येक दिन के आधार पर। (v) प्रवीणता के बजाय अनुभव पर जोर।


(vi) विकास के लिए आवश्यक अभ्यास एवं लचीलापन। (vii) स्थानीय सामानों, कला एवं ज्ञान-कौशल का प्रयोग जो संस्कृति के विविधता में एकता को दर्शाती हो।


स्रोत (Source): Position Paper, National Focus Group on ECCE, 2005. कहानियों को सुनने, कविता पाठ लिखने, काल्पनिक कथाओं एवं कहानियों का मंचन प्रश्न पूछना, साधारण समस्याओं का हल प्रयोगों को गति देना जो क्रियाशीलता एवं गतिविधियों पर आधारित हो ।


For children 4 to 6 years


1. Reading Readiness: चित्र-आवाज मिलान, आकार, ध्वनियाँ, शब्द भण्डार वृद्धि, भाषिक अभिव्यक्ति, कहानी कहना, चित्र के साथ पुस्तक का रुचि के साथ पठन। 2. Writing Readiness: आँख-हाथ का समन्वय, लिखने की रुचि का विकास।

3. Maths : वर्गीकरण, श्रेणीकरण, पैटर्न निर्माण, तार्किक, समस्या समाधान, निर्माण प्री संख्या एवं संख्या बोध इत्यादि का कौशल विकास। संकल्पना


4. Motor Development Puzzles, कूदना, दौड़ना, गतिविधियों के संतुलन का


विकास।


5. Creativity and Aesthetic appreciation सृजनात्मक नाटक, सांस्कृतिक गतिविधि, परिभ्रमण इत्यादि।


ये सारे कार्यक्रम प्रत्येक बच्चे एवं समूह के बच्चों के लिए प्रासंगिक होने चाहिए। पाठ्यक्रम केवल पाठ्य-विवरण ही नहीं, अपितु बच्चे के बहुमुखी व्यक्तित्व का शिक्षा के पूर्ण निर्धारित उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए शिक्षक सीखने-सिखाने की परिस्थितियों का नियोजन करता है। पाठ्यक्रम में वे सब विषय व क्रियाएँ सम्मिलित होनी चाहिए जिनसे बच्चे का सर्वांगीण विकास हो। पाठ्यक्रम में बच्चे के शारीरिक, बौद्धिक, सामाजिक, नैतिक तथा आध्यात्मिक विकास सम्बन्धी ज्ञान देने के लिए विभिन्न विषयों का समावेश होना चाहिए ताकि बच्चे के व्यक्तित्व का सम्पूर्ण विकास हो।


प्रश्न 3. ECCE उद्देश्यों का वर्णन करें। 

उत्तर - वैश्विक अनुसंधान ने यह सिद्ध किया है कि मानवीय मस्तिष्क का विकास प्रथम


छह वर्ष तक चरमोत्कर्ष पर होती है। ईसीसीई पाठ्यचर्या का मुख्य उद्देश्य है कि बच्चों को उनके क्षमता के अनुसार उनका सर्वांगीण विकास हो। बच्चे के शारीरिक एवं मानसिक विकास पाठ्यचर्या के केन्द्र बिन्दु है।


Objectives of ECCE (ईसीसीई पाठ्यचर्या के उद्देश्य) 1. बच्चों के समग्र विकास का उन्नयन करना।


2. बच्चों को औपचारिक स्कूल के लिए तैयार करना।


3. प्राथमिक शिक्षा के सर्वव्यापीकरण के लिए योगदान 4. प्राथमिक शिक्षा के अवरोधों को कम करना।

देना।

5. ECCE के विभिन्न डिग्रियों पर जोर देना जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग लाभान्वित हो सकें। इसके लिए ICDS (Integrated child Development Service) को

शक्ति प्रदान करने की जरूरत है। 6. विभिन्न विकल्पों के साथ Pre schooling पर जोर देना।


7. संविधान के अनुच्छेद 45 के अन्तर्गत भारत के विभिन्न राज्यों को ECCE के लिए व्यापक प्रयास करने के लिए जोर देना।


8. सरकार को बाह्य करना कि पूर्व प्राथमिक बाल्यावस्था के बच्चों को भी अनिवार्य एवं मुफ्त शिक्षा उपलब्ध हो अर्थात् ECCE को भी शिक्षा के अधिकार, 2009 के साथ समाहित करवाया जाये। 9. सर्वशिक्षा अभियान (SSA) के तहत चल रहे 73860ECCE केन्द्रों का उन्नयन

करना। 10. छह वर्ष तक के बच्चों के पूरक पोषण की व्यवस्था

11. समय-समय पर बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण।

12. इन बच्चों के टीकाकरण की सुविधा। 13. Pre school एवं primary school को

जोड़ने का काम करना ।

14. विभिन्न तरह के शैक्षिक गतिविधियों के कार्यान्वयन पर जोर यथा कहानी कहना एवं सुनना, कविता पाठ, गाना गान, रंग एवं आकारों का बोध, समूह का नाम, अच्छी आदतों का निर्माण (हाथ धोना, साझेदारी करना इत्यादि।)

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